टेढी मेढी बुनियादो! पर भवन खडा हेै
राजनीति मे! लावारिस भी एक धडा है
हारे थके सिपाही धन्धा ढूॅ!ढ रहे है!
लूले,ल!गडे़,काणे बन्दा ढूॅ!ढ रहे है!
वाह रे,प्रजातन्त्र तेरी माया है न्यारी
भूखे-न!गे पाल रहे है! खद्दरधारी
बीहड़ के डाकू स!सद की षान बढाये!
राश्ट्र-गीत भी राश्ट्र लूटने वाले गाये!
थर्ड- मोरचा बनने की भी तैयारी है
जनमत मे!ये सारे ख!जर,दो धारी है!
गाली देकर भी सत्ता,ख!गाल रहे है!
सपनो के गमले मे!बरगद पाल रहे है!
पहले भी तो थर्ड-फ्रन्ट स्ट!ट बने थे
जनमत की धरती मे!,खरपतवार घने थे
सपा.बासपा,सी.पी.एम और सीपीआइ
ममता,समता ने भी अपनी टाॅ!ग अडायी
पूरबपष्चिमउत्तर,दक्षिण के लावारिस
वो भी बनना चाहते हे!नाजायज वारिस
तैयारी मे! बाबा और अन्ना के चेले
नीम , गिलोइ के उपर भी चढे़ करेले
ये चैराहो! के लावारिस भी तैयारी मे!
गाजर घासे!प्रजातन्त्र की इस क्यारी मे!
जनमत की पूॅ!जी को ये मिलकर खाये!गे
धोती और ल!गोटे अब स!सद जाये!गेे
भानूमति के कुडमे! के ये प्रतिनीधी है!
सत्ता कब्जाने की इनकी एक विधी है
जनता से क्या लेना,सारे भाड़मे! जाय
ये स!सद है,प्रजातन्त्र का एक सराॅ!य
कटे ठू!ट मे!,हरी-भरी कुछ पत्ती जागी
इस भारत की जनता भी है बडी अभागी
दारू,अय्यासी ,पैसो! मे! बिक जाती है
नालायक सन्तान देष को क्यो! खाती हैे
कामरेड नीतीष,नवीन और ममता,समता
माया और मुलायम भी हैे पक्का रमता
चार दिषा के गिरे,पडे़ कई और मिले!गे!
लोकतन्त्र का नया झगोला सभी सिले!गे!
कितने दुर्दिन भारत माता अब देखेगी
बची राश्ट्र कर इज्जत कीचड़मे!फे!केगी
चाय पकौडीअश्टा!गयोग का ही खोै!चा है
भारत मा! की इज्जत को सबने पो!छा है
देख चुनाव के कोठे मे! अब दा!व लगे है!
कल तक थे विपरीत देख लो आज सगे है!
ये,चोर,उचक्के,डाकू,आपस मे!भ्राता है!
कवि आग खुरकी है लिखता ही जाता है!!

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